Wednesday, March 9, 2011

अमेरिका में यौन उत्पीड़न के आरोपी 'गुरु' को सजा

पीटीआई॥ ह्यूस्टन
अमेरिका में दो लड़कियों का यौन उत्पीड़न करने के आरोपी धर्मगुरु प्रकाशानंद सरस्वती (82 वर्ष) को सजा सुनाई गई है। यौन उत्पीड़न 20 बार किए जाने का आरोप था। अब हर आरोप के लिए 14 साल कैद और 10 हजार डॉलर जुर्माने की सजा सुनाई गई है।
हेज काउंटी की आठ पुरुषों और चार महिलाओं की जूरी ने मंगलवार को सजा सुनाई। आश्रम के प्रवक्ता का कहना है कि गुरु कहां हैं, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है। एक भक्त पीटर स्पीजेल ने भी कहा है कि उसके पास प्रकाशानंद की जानकारी नहीं है। धनी पीटर ने गुरु की बॉण्ड पर रिहाई के लिए 10 लाख डॉलर दिए थे। इससे गुरु को बॉण्ड पर रिहा कर दिया गया था। वह सजा सुनाए के दौरान सोमवार को नहीं आया तो जज ने बॉण्ड खत्म करने और गिरफ्तारी वॉरंट जारी करने के लिए कहा था।
प्रकाशानंद ने सेंट्रल टेक्सस में बरसाना धाम आश्रम की स्थापना की थी। आरोप था कि उसने वहीं लड़कियों का यौन उत्पीड़न किया। करीब 27 और 30 साल की दो लड़कियों ने तीन साल पहले जानकारी दी थी कि 1993 से 1996 के बीच जब हम किशोरावस्था में थीं, तब प्रकाशानंद ने हमारा यौन उत्पीड़न किया था। इनमें एक लड़की ने कहा कि हम उनके आश्रम में रहती थीं, जहां सख्त ड्रेस कोड लागू था और साथ ही जबरदस्त घेरेबंदी भी थी।
प्रकाशानंद के वकील ने आश्रम में लड़की की स्विमसूट और शॉर्ट्स में तस्वीरें दिखाईं। यह भी बताया कि लड़की 1998 में आश्रम छोड़ने के बाद दोबारा आई। बकौल वकील, 'जिन घटनाओं का जिक्र किया गया, उनके बाद लड़की ने प्रकाशानंद को बर्थडे ग्रीटिंग कार्ड दिया। लड़की ने पैसे ऐंठने के लिए यह दावा किया है।' उधर लड़की ने कहा था कि पैसा कमाना मेरा मकसद नहीं है। जहां तक आरोप देर से लगाने की बात है तो मुझे पहले आश्रम में रह रहे अपने परिवार की चिंता थी।
प्रकाशानंद सरस्वती को श्री स्वामीजी के नाम से भी जाना जाता है। उसका दावा है कि दुनिया भर में मेरे हजारों अनुयायी हैं। बरसाना धाम आश्रम जिस संगठन से जुड़ा है, उसके भारत और अन्य देशों में अस्पताल और मंदिर हैं।

कंडोम के इस्‍तेमाल पर कट्टरपंथियों के खिलाफ खड़े हुए पढ़े-लिखे मुसलमान

नई दिल्ली. टीवी, सिनेमा देखने और कंडोम के इस्तेमाल के प्रश्न पर मुस्लिम समुदाय दो धड़ों में बंट गया है। जमीयत-उलेमा-ए-हिंद ने हाल ही में युवाओं को टीवी और सिनेमा से दूर रहने को कहा है और कहा है कि ए़ड्स से बचाव के लिए जो उपाय (कंडोम) बताया जाता है, वही समाज में युवाओं के पतन का मुख्य कारण है। लेकिन उदारपंथी धड़े ने इसकी मुखालफत की है।

जमीयत-उलेमा-ए-हिंद ने हाल ही में एक बैठक में प्रस्ताव पारित किया कि सभी गांवों और शहरों में मुस्लिम समाज को कमेटियां बनानी चाहिए, जो युवाओं को कड़ाई से धार्मिक रीति रिवाजों को मानने की शिक्षा दे और उन्हें टीवी, सिनेमा के अलावा दूसरे नैतिक रूप से भ्रष्ट करने वाले तरीकों से दूर रहने के लिए प्रेरित करे। लेकिन उदारवादी मुस्लिमों ने इसकी आलोचना की है।

ऑब्जेक्टिव स्टडीज संस्थान के चेयरमैन मोहम्मद मंजूर आलम ने कहा कि यदि युवा टीवी ही नहीं देखेंगे तो वे पीस टीवी और विन टीवी, जो मुस्लिम धर्म के बारे में शिक्षा देते हैं और जागरुक करते हैं, को भी नहीं देख सकेंगे। उन्होंने कहा कि टीवी चैनलों में ज्ञान और जानकारी की बातें भी आती हैं। अब युवाओं को अच्छे और बुरे के बीच अंतर करना होगा। लेकिन टीवी देखने से कैसे दूर रखा जा सकता है।

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड से जुड़े हुए मुंबई के वकील वाईएच मुछाला ने कहा कि यदि इस प्रस्ताव का अर्थ यह है कि कंडोम का विज्ञापन करने वाली कंपनियां भड़काऊ विज्ञापन देती हैं तो यह तर्क माना जा सकता है लेकिन लेकिन शब्दों का चयन बेहतर होना चाहिए था। संगठन के प्रस्ताव से सही संदेश नहीं जा रहा है।

जामिया सेंटर फॉर दलित एंड माइनॉरिटी स्टडीजके प्रोफेसर मुज्तबा खान के अनुसार सरकार द्वारा कंडोम का प्रचार-प्रसार वैज्ञानिक आधार पर किया जाता है। फिर यह सभी धर्मों के लिए है, केवल मुस्लिम धर्म के लिए नहीं। यह तो जागरुकता का मामला है। यदि इन जानकारियों के साथ ही उन्हें मुस्लिम धर्म के बारे में शिक्षा दी जाए, तो उनमें जागरुकता आएगी।

जमीयत-उलेमा-ए-हिंद द्वारा पारित प्रस्ताव में मुस्लिम युवाओं के धर्म से भटकने पर भी चिंता जताई गई है। प्रस्ताव में कहा गया है कि मुस्लिम युवाओं में सेक्स, ड्रग्स का चलन काफी बढ़ गया है। मुस्लिम युवा पश्चिमी सभ्यता से ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं और यदि यह जारी रहा तो इससे धर्म की पहचान का संकट पैदा हो सकता है।  प्रस्ताव में आडंबरपूर्ण शादी की आलोचना की गई और दहेज प्रथा को पूरी तरह खत्म करने की बात कही।

फतवे को मानना बाध्यता नहीं
इस्लाम धर्म में फतवा उस सलाह अथवा दिशा निर्देश को कहा जाता है जोकि इस्लामी शरिया तथा इस्लामी कायदे-कानून को मद्देनज़र रखते हुए इस्लाम के किसी विद्वान द्वारा जारी किया जाता है। आमतौर पर फतवा जारी करने का अधिकार मुफ्ती या दूसरे मुस्लिम विद्वान को ही होता है। कुछ इस्लामिक संस्थाओं ने फतवा जारी करने के लिए विद्वानों की समिति गठित की है।

फतवा मात्र दिशा निर्देश अथवा सलाह की हैसियत ही रखता है यह आदेश कतई नहीं है। किसी फतवे को मानना आम मुसलमान के विवेक पर निर्भर है। इस्लामी धर्मगुरु समय-समय पर सामाजिक मुद्दों पर फतवे जारी करते हैं, जिनका उद्देश्य समाज का उत्थान होता है।

अक्सर विवादों में घिरे हैं फतवे
मुस्लिम विद्वानों ने एक फतवा जारी कर योग को गैर-मुस्लिम बताया गया। कुछ फतवों में औरतों को गैर-मर्दों के साथ बात करने के लिए भी मना किया गया है। ख़ुशबू, इत्र अथवा परफ्यूम महिलाओं को इस्तेमाल न करने की सलाह दी गई है। खनकती हुई चूड़ियां तथा पायल आदि पहनने को भी गैर इस्लामी बताया गया है। फतवे के अनुसार इन सब वस्तुओं के प्रयोग से मर्द औरतों की ओर आकर्षित होते हैं। फिल्म स्टार सलमान ख़ान द्वारा पूजा करने पर भी फतवा जारी हुआ।

वंदेमातरम गाए जाने के विरुद्ध भी फतवा जारी किया जा चुका है। संगीत सुनने, टीवी देखने तथा नाच गाने आदि के विरुद्ध भी फतवे आ चुके हैं। क्रेडिट कार्ड रखने, कैमरायुक्त मोबाईल फोन को भी फतवों में इस्लाम के खिलाफ बताया गया है। फतवों के अनुसार बीमा करना या कराना ब्याज आधारित व्यवस्था, जैसे बैंक आदि के खिलाफ भी फतवे जारी हुए हैं।


हसन अली: कबाड़ी बन गया खरबपति कारोबारी, देश का सबसे बड़ा टैक्‍स ‘चोर’


नई दिल्‍ली. देश में टैक्‍स चोरी के सबसे बड़े आरोपी हसन अली खान की असल जिंदगी किसी फिल्‍मी कहानी जैसी लगती है। पुणे के इस व्यवसायी पर स्विस बैंक में करीब आठ अरब अमेरिकी डॉलर का काला धन जमा करने का आरोप है। लेकिन उसने कबाड़ का धंधा करने की बात कबूल की थी। उसका कहना है कि इस धंधे से उसे सालाना 30 लाख रुपये की कमाई होती है। लेकिन शानदार पार्टियां व घुड़दौड़ आयोजित करने के साथ महंगी कारें रखने के शौकीन हसन अली पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का शिकंजा कसता जा रहा है।खान की कहानी की शुरुआत हैदराबाद से होती है। वह हैदरबाद में तैनात रहे एक्‍साइज अफसर का बेटा है। खान के शुरुआती दिनों के बारे में कई बाते सामने आती रही हैं लेकिन वह चर्चा में उस वक्‍त आया जब उसके पास बड़े पैमाने पर काला धन की बात सामने आई। शुरुआती दिनों में उसने पुरानी चीजें बेचने सहित कई तरह के धंधे किए। हसन अली का दावा है कि वह हैदराबाद के निजाम के खानदान से ताल्‍लुक रखता है।घुड़दौड़ के कारोबार की दुनिया से वह 1990 के शुरुआत में जुड़ा जब वह हैदराबाद में ही रहता था। बाद में वह इसी कारोबार से जुड़े रहते हुए मुंबई गया फिर पुणे और अन्‍य शहरों का रुख किया। कहा जाता है कि उसने अपनी पहली पत्‍नी को तलाक दे दिया है जिसके साथ वह हैदराबाद में रहता था। वह रहीमा (मौजूदा पत्‍नी) से शादी करने के बाद पुणे जाकर बस गया। देश के कोने में कहीं भी होने वाले घुड़दौड़ में अक्‍सर यह जोड़ी दिख जाती है।मुंबई के कोर्ट में चल रहे हसन अली केस में कोर्ट ने ईडी को फटकार भी लगाई है। स्‍पेशल कोर्ट ने जांच एजेंसी से पूछा किया कि काले धन को लेकर हसन अली को कस्टडी में रखने के लिए अभी तक कोई मुकदमा क्‍यों नहीं दर्ज की है। 58 साल के हसन के मसले पर सुप्रीम कोर्ट ने भी केंद्र सरकार को मंगलवार को फटकार लगाई थी।

शीर्ष अदालत ने सरकार से पूछा कि हथियार कारोबारियों और आतंकी गतिविधियों में लिप्त लोगों से संपर्क रखने के आरोप में हसन अली के खिलाफ पोटा सहित अन्य सख्त कानूनों के तहत मुकदमा क्यों नहीं दर्ज कराया गया? विदेशों में काला धन रखने के आरोप में ईडी ने हसन को गत सोमवार देर रात गिरफ्तार किया था। आयकर विभाग ने 2007 में हसन अली के घर छापा भी मारा था। आरोप है कि हसन अली विदेशी बैंकों में काला धन जमा करने वाले भारतीयों के लिए एजेंट के तौर काम करता है। इसके बदले वह ऐसे लोगों से कमीशन वसूलता है। खान पर 50 हजार करोड़ रुपये से अधिक की कर चोरी का आरोप है। सरकार ने पिछले साल राज्‍य सभा में एक सवाल के जवाब में कहा था कि हसन अली पर यह बकाया ब्‍याज सहित 70 हजार करोड़ रुपये से भी अधिक हो गया है।

ईडी ने 2007 में स्विस बैंक से हसन अली के एकाउंट का ब्‍यौरा मांगा था। लेकिन स्विस बैंक ने उससे जुड़ी जानकारियां भारतीय जांच एजेंसियों को साझा करने से मना कर दिया था। उन्‍होंने इसके लिए तकनीकी कारणों का हवाला देते हुए कहा कि भारत में टैक्‍स रिटर्न फाइल नहीं करना स्विट्जरलैंड के कानूनों के तहत अपराध नहीं है।

हसन अली मामले में पहले केस तो ठीक से बनाओ

नई दिल्ली. देश में टैक्स चोरी के सबसे बड़े आरोपी और घोड़ों के व्यापारी हसन अली खान मामले में मुंबई की एक अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की खिंचाई की है। कोर्ट के मुताबिक, ईडी ने हसन अली के खिलाफ केस तैयार करने में ढिलाई बरती।

ईडी ने हसन अली का रिमांड मांगा था। इस संबंध में अब गुरुवार को सुनवाई होगी। सुनवाई के दौरान प्रधान सेशन जज एमएल टाहिलियानी ने ईडी से कहा कि यदि उन्हें केस तैयार करने के लिए समय चाहिए तो वे ले सकते हैं। लेकिन यदि बिना तैयारी के आएंगे तो वे उनकी बात नहीं सुनेंगे।

क्षेत्राधिकार का सवाल:

ईडी ने हसन अली के रिमांड की याचिका मंगलवार को लगाई थी। इस पर सुनवाई करते हुए जज ने ईडी से सवाल किया था कि यह मामला उनके क्षेत्राधिकार का है भी या नहीं। फिर उन्होंने सुनवाई बुधवार तक के लिए टाल दी थी। लेकिन जब बुधवार को सुनवाई शुरू हुई तो भी ईडी क्षेत्राधिकार के बारे में पुख्ता तर्क नहीं दे पाया। जज ने इस मामले की सुनवाई फिर टाल दी है।

गंभीर आरोप:

हसन अली को सोमवार रात गिरफ्तार किया गया था। हसन अली पर विदेश में 8 अरब डॉलर (करीब 36 हजार करोड़ रु.) का कालाधन जमा करने, 40 हजार करोड़ रुपए की टैक्स चोरी करने और हवाला कारोबार में लिप्त होने के आरोप हैं। इसके अलावा हसन के दाऊद इब्राहिम तथा हथियारों के तस्कर अदनान खशोगी से संबंध होने का खुलासा भी हुआ है। हालांकि, हसन इन सभी आरोपों से इनकार कर रहा है।

सुप्रीम कोर्ट का रुख सख्त:

सुप्रीम कोर्ट ने हसन अली के हथियार सौदागरों और आतंकी संगठनों के रिश्ते होने के आरोपों से केंद्र सरकार से मंगलवार को पूछा था कि उसके खिलाफ आतंक निरोधक कानून के तहत कार्रवाई क्यों नहीं हो रही।

अखिलेश की गिरफ्तारी पर सपाइयों का हंगामा

नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। उत्तर प्रदेश की मायावती सरकार और सपा के बीच शुरू हुई जंग का एक हिस्सा अब दिल्ली में लड़ा जाएगा। प्रदेश सरकार के खिलाफ आंदोलन के चलते अखिलेश यादव समेत दूसरे सपा सांसदों की जगह-जगह गिरफ्तारी को पार्टी उनके विशेषाधिकार हनन का मुद्दा बनाएगी। पार्टी सांसदों ने बुधवार को इन मामलों को लोकसभा में फिर उठाया। साथ ही प्रदेश सरकार पर राजनीतिक विरोधियों को प्रताड़ित करने का आरोप उसे बर्खास्त करने की मांग की।
मायावती सरकार के खिलाफ आंदोलन के चलते गिरफ्तारी के बाद सैकड़ों समर्थकों के साथ इटावा जेल में बंद सपा महासचिव व राज्यसभा सदस्य प्रो. रामगोपाल यादव ने कहा कि बिना पर्याप्त वजह के सांसदों को गिरफ्तारी करना अवमानना के दायरे में आता है। पार्टी सांसद अखिलेश यादव को बुधवार को लखनऊ में अमौसी हवाई अड्डे से निकलते ही पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। न तो वहां कोई आंदोलन हो रहा था और न ही वहां धारा-144 लागू थी। यह संसद की अवमानना है। लोकसभाध्यक्ष से इसकी शिकायत की जाएगी।
उन्होंने कहा कि इसी तरह सांसद रेवतीरमण सिंह व पार्टी के दूसरे सांसदों को भी अनावश्यक रूप से गिरफ्तार किया गया है। बिना किसी आंदोलन में शामिल हुए ही पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व सांसद मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव को दो दिन पहले लखनऊ में पुलिस ने घर से बाहर नहीं निकलने दिया। सांसद की अवमानना की इस कार्रवाई की शिकायत लोकसभाध्यक्ष से पहले ही की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि दरअसल प्रदेश सरकार शांतिपूर्ण आंदोलन को भी दमन के जरिए कुचलने पर उतर आई है। यही वजह है कि वह सांसदों की अवमानना के हद तक जा रही है।
बुधवार को लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही सपा सांसद लोकसभा अध्यक्ष मीराकुमार केआसन तक आ गये। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अपने राजनीतिक विरोधियों को प्रताड़ित कर रही है। उसे बर्खास्त किया जाना चाहिए। मीरा कुमार ने कहा कि इस मामले में जांच की बात के बारे में वह मंगलवार को ही बता चुकी हैं, इसलिए सांसदों को इस पर शोर नहीं मचाना चाहिए।

अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम की संपत्ति को कराया अपने नाम


मुंबई। अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम की यहां नीलाम हुई संपत्ति आखिरकार दिल्ली के वकील अजय श्रीवास्तव को मिल गई है। श्रीवास्तव ने 2001 में दाऊद की दो संपत्तियों को खरीदने का साहस दिखाया था। लेकिन दाऊद की बहन हसीना पारकर ने इनका कब्जा देने से इनकार कर दिया। लगभग 10 साल की कानूनी लड़ाई के बाद कोर्ट ने इन संपत्तियों का कब्जा श्रीवास्तव को देने का फैसला सुनाया है।

श्रीवास्तव ने बताया, ‘आयकर विभाग ने 2001 में दाऊद की 11 बेनामी संपत्तियों की नीलामी के लिए बोली आमंत्रित की थी। पहली बार जब देशभर में से किसी ने भी बोली लगाने का साहस नहीं दिखाया, तो मैंने दूसरी बार आयोजित नीलामी में बोली लगाई। फिर नागपाड़ा स्थित दो संपत्तियों को ढाई लाख रुपए में खरीदा। लेकिन हसीना पारकर ने कब्जा देने से इनकार कर दिया जिसकी वजह से मुझे कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा।’ श्रीवास्तव ने जिन दो संपत्तियों को सिर्फ ढाई लाख रुपए में खरीदा था, आज उसकी कीमत बढ़कर पांच करोड़़ रुपए से भी अधिक हो गई है।

तृतीय-विश्वयुद्ध' भड़का सकता है अमेरिका का कदम, दो गुटों में बंट रहा है विश्व!


त्रिपोली. लीबिया में गद्दाफी समर्थकों और विद्रोहियों  के बीच सत्ता हस्तांतरण को लेकर चल रहा सैन्य संघर्ष दुनिया को महाविनाश की और धकेल सकता है। गद्दाफी समर्थक वायु सेना द्वारा प्रदर्शनकारियों पर किए जा रहे हमलों को देखते हुए पश्चिमी देश लीबिया को जल्द से जल्द'नो फ्लाई ज़ोन' घोषित करना चाहते हैं। लेकिन गद्दाफी ने साफ कर दिया है कि यदि इस तरह का कोई प्रयास किया गया तो इसका जवाब हथियार से ही दिया जाएगा। इसी बीच कुछ प्रदर्शनकारियों ने लंदन में गद्दाफी के बेटे के बंगले पर कब्जा कर लिया है। गद्दाफी ने प्रमुख विरोधी नेता अब्दुल जलील  पर 400,000 डॉलर (याने करीब 1.8 करोड़ रुपए) का नाम रखा है। लीबिया में युद्ध तेज हो गया है और पहली बार मुअम्मर गद्दाफी ने तेल के बड़े ठिकानों पर बमबारी की है।

लीबिया को 'नो फ्लाई ज़ोन'घोषित करने का मतलब होगा कि देश के लड़ाकू विमान अगर आसमान में दिखे तो उन्हें मार गिराया जाएगा। अमेरिका और मित्र देश नाटो सेनाओं की मदद से जल्द ही ऐसा कदम उठा सकते हैं।

लेकिन अमेरिका के इस निर्णय का अर्थ गृह- युद्ध से जूझ रहे एक देश में फौजी हस्तक्षेप करना होगा, जो अरब देशों ख़ास कर ईरान को कतई मंज़ूर नहीं है। अंग्रेजी के प्रतिष्ठित अखबार द गार्जियन के अनुसार कर्नल गद्दाफी ने भी साफ़ कर दिया है कि यदि लीबिया पर 'नो फ्लाई ज़ोन' जैसा कोई भी कदम उठाया गया तो उसका जवाब 'हथियार' से ही दिया जाएगा।

गद्दाफी के अनुसार पश्चिमी मुल्कों का असल मकसद लीबिया के तेल संसाधनों पर कब्ज़ा जमाना है। यही नहीं,ईरान ने तो खुलकर धमकी दी है कि यदि नाटो सेनाओं ने लीबिया पर सैन्य कार्रवाई की तो वहां उसके सैनिकों की कब्रगाह बन जाएगी। ऐसे में लीबिया में चल रहा गृह युद्ध किसी बड़े विवाद में तब्दील हो सकता है।

फिर बन रहे हैं दो ध्रुव

लीबिया का संकट धीरे-धीरे विश्व युद्ध में भी बदलने के आसार दिख रहे हैं। लीबिया के मुद्दे पर विश्व अब दो धड़ों में बंट रहा है। अमेरिका के विरोधी देश, धीरे-धीरे या तो गद्दाफी के पक्ष में आ रहे हैं या फिर वे चुप हैं।

वहीं बेलारूस भी लीबिया के समर्थन में आ गया है। दोनों देशों के बीच कई विमानों को उड़ान भरते देखा गया है। यही नहीं हथियारों से लैस कई पोत बेलारूस से लीबिया पहुंच चुके हैं। यह जानकारी हथियार विशेषज्ञ हग ग्रिफिथ ने एक विदेशी पत्रिका में दी। हग स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट के लिए भी काम कर चुके हैं। क्यूबा, वेनेजुएला आदि देश भी लीबिया के समर्थन में हैं। लेटिन अमेरिका के इन देशों के अलावा भी कई देशों ने लीबिया को समर्थन दिया है।

किस देश के क्या हित जुड़े हैं

पहले दो विश्व युद्धों की तरह की स्थितियां इस बार भी बन रही हैं। अमेरिका की निगाहें तेल निर्यातक देशों पर हैं। इसी के चलते अमेरिका ने रासायनिक हथियारों की जांच की आड़ में इराक पर हमला कर तानाशाह सद्दाम हुसैन को सजा दी थी। अब मिस्र और लीबिया में भी वह हस्तक्षेप कर रहा है। मध्य-पूर्व के देश अमेरिका के हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं करना चाहते हैं। ईरान इस मामले में खुल कर अमेरिका का विरोध कर रहा है। वैसे भी ईरान के अमेरिका के साथ रिश्ते सौहाद्र्रपूर्ण नहीं हैं, दूसरा अगर मध्य-पूर्व में अमेरिका का नियंत्रण और प्रभुत्व स्थापित होता है तो इससे ईरान की नीतियों पर भी असर पड़ेगा।

ऐसे में लीबिया का साथ देना ईरान की मजबूरी है। बेलारूस इसलिए लीबिया का समर्थन कर रहा है, क्योंकि इसमें उसके राजनैतिक और आर्थिक हित हैं। रूस भी अगर साफ तौर पर लीबिया के साथ नहीं दिख रहा है तो भी वह परोक्ष रूप से उसका समर्थन कर रहा है। मध्य-पूर्व में अमेरिका इसलिए विशेष रुचि ले रहा है, क्योंकि अमेरिका की नजर मध्य-पूर्व के अकूत तेल भंडार पर है। ऐसे में विषम होती परिस्थितियां तृतीय विश्व युद्ध का संकेत दे रही हैं।

लीबिया की धमकी से डरा अमेरिका?

लेकिन लग रहा है कि फिलहाल अमेरिका और नाटो सेनाएं लीबिया में हमला करने की धमकी से अब पीछे हटते दिखाई दे रहे हैं।  नाटो प्रमुख ने कहा है कि लीबिया में तत्काल हस्तक्षेप की कोई योजना नहीं है, लेकिन गठबंधन की सेनाएं किसी भी घटनाक्रम पर तुरंत कदम उठाने को तैयार है। इसी बीच एक लीबियाई अधिकारी मिस्र की राजधानी पहुंचा है। आज भी भारतीय नागरिकों का अंतिम जत्था लीबिया से लौटेगा।इसी बीच लीबिया में सरकार समर्थक और विरोधियों के बीच हिंसा जारी है।

अमेरिका ने हालांकि पहले धमकी दी कि वे लीबिया पर सैन्य हमला करने के विकल्प पर भी विचार कर रहे हैं। लेकिन अब इसे टाल दिया गया है।  नाटो प्रमुख अंदर्स फो रासमुसेन ने कहा कि लीबिया में किसी भी तरह की कार्रवाई के लिए संयुक्त राष्ट्र का जनादेश और व्यापक अंतरराष्ट्रीय समर्थन जरूरी है। ब्रिटेन के स्काई न्यूज से बातचीत में उन्होंने कहा, नाटो लीबिया में कोई हस्तक्षेप नहीं करने जा रहा है, लेकिन हमने अपनी सेनाओं से कहा है कि किसी भी तरह के हालात से निपटने के लिए वे अपनी योजना तैयार रखें। उन्होंने कहा कि इस बारे में क्षेत्र में बहुत सी बातों का ख्याल रखना होगा क्योंकि इसे विदेशी सैन्य हस्तक्षेप समझा जा सकता है। इसलिए ऐसे किसी भी कदम के लिए व्यापक अंतरराष्ट्रीय समर्थन बेहद जरूरी है।

अमेरिका ने कहा नो फ्लाइंग जोन का फैसला संयुक्त राष्ट्र को लेना है

अमेरिकी विदेश हिलेरी क्लिंटन ने कहा कि नो फ्लाई जोन लागू करने के बारे में संयुक्त राष्ट्र को फैसला लेना है। नाटो प्रमुख भी इस बात से सहमत हैं. उन्होंने कहा,  नो फ्लाई जोन स्थापित करना थोड़ा सा पेचीदा है। इसके लिए भी संयुक्त राष्ट्र के जनादेश की जरूरत होगी। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का मौजूदा प्रस्ताव सैन्य बलों के इस्तेमाल की इजाजत नहीं देता। ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने भी इसी तरह की बात कही है। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन नो फ्लाई जोन सहित लीबिया के खिलाफ उठाए जाने वाले संभावित कदमों पर अंतरराष्ट्रीय समर्थन चाहता है।

तेल में लगेगी आग

लीबिया के संकट के बाद विश्व पर तेल की कमी का खतरा भी मंडरा रहा है। विश्व के सबसे बड़े तेल उत्पादक देश सऊदी अरब में तेल कंपनियों के शेयर एकदम गिर गए हैं। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के अधिकारी फातिह बैरोल ने कहा कि सस्ते तेल का समय अब खत्म हो गया है। कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात में भी तेल कंपनियों के शेयर के दाम नीचे आ गए हैं। लीबिया से तेल का निर्यात रुका हुआ है और अब तेल उत्पादक दूसरे देश भी कीमतें बढ़ाने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं।

लंदन में गद्दाफी के बंगले पर कब्जा

लंदन में कुछ प्रदर्शनकारियों ने उत्तरी लंदन के महल पर कब्जा कर लिया। यह महल गद्दाफी के बेटे सैफ का है। इन प्रदर्शनकारियों के नेता ने कहा कि उन्हें ब्रिटेन की सरकार पर यकीन नहीं है। उन्होंने कहा कि गद्दाफी की पूरी संपत्ति लीबियाई निवासियों को ही मिलनी चाहिए। इस बंगले में स्विमिंग पूल, स्पा और सिनेमा घर भी हैं।

विपक्षी नेता पर इनाम

लीबिया में युद्ध काफी तेज हो गया है। पहली बार गद्दाफी ने देश के प्रमुख तेल ठिकाने पर बमबारी की है। इसके अलावा गद्दाफी ने मुख्य विरोधी नेता की गिरफ्तारी के लिए नगद इनाम की भी घोषणा की है।


Tuesday, March 8, 2011

पसीना है सफलता का ईधन

नई दिल्ली। जीवन में हम जो भी करते हैं, उसमें समस्याएं एवं व्यवधान आते ही हैं। हर कोई जीवन में परेशानियों से दो-चार होता है। यह परिवार, मित्रों, पैसा काम, विवाद या बीमारी से जु़डा हो सकता है। ऎसी बहुत सारी चीजों को जो हम चाहते हैं, मगर इससे पहले कि हम उसे हासिल कर सकें हमें कई समस्याओं से जूझना प़डता है। दुनिया में सबसे आसान है यह कहना कि "मैं यह नहीं कर सकता" और उस काम को छो़ड देना। ऎसा करने की बजाय हम कुछ समय का विराम लेकर ये क्यों नहीं सोचते कि कैसे हम राह की मुश्किलों पर विजय प्राप्त करें।
यदि हम यह मान लें कि ये मुश्किलें इस सफर का विराम है तो मुश्किल से मुश्किल परेशानी का हल निकल आएगा। इसको छो़ड देना या परेशानी पर फतह हासिल करना ये दोनों विकल्प हम सबों के अंदर होते हैं। किसी भी मुश्किल पर विजय हासिल करने के लिए पहला कदम है कि आप यह विश्वास करें कि आप ऎसा कर सकते हैं। हमारे जीवन में हर चीज की शुरूआत विकल्प के साथ होनी है।
जीवन में सफलता इस बात में निहित है कि आप अपने लक्ष्य के प्रति दृढ़ एवं सतत प्रयासरत हैं। हम में से कई लोग ऎसा सोचते हैं कि हम जो चाहते हैं जीवन हमें नहीं दे रहा है या सफलताएं भाग्य की देन हैं। मगर उस प्रयास, मेहनत एवं दर्द की सराहना नहीं करते हैं जो लक्ष्य प्राçप्त की राह में आते हैं। सफल व्यक्ति सफलता भाग्य से नहीं, वरन् अपनी लगन से हासिल करता है। याद रहे कि भगवान हर पक्षी और जानवर को खाना देता है, पर उनके मुंह में नहीं डालता है। इसके लिए उन्हें मेहनत करनी प़डती है। कोई भाग्य तब तक काम नहीं करता जब आप स्वयं कुछ कर्म न करें। थो़डा पाने के लिए कभी-कभी ढेर सारे अच्छे काम भी खोने प़डते हैं। आप जितनी मेहनत करेंगे, भाग्य उतना ही आपका साथ देगा। आप जो चाहते हैं, उसके लिए यदि अपना 100 प्रतिशत देते हैं तो उसे प्राप्त करेंगे। हम अवसर को समझ नहीं पाते, क्योंकि वह क़डी मेहनत मांगता है। यह याद रखने योग्य है कि कोई भी व्यक्ति क़डी मेहनत के पसीने में डूबा तो लेकिन मरा नहीं है। कर्म करने से ही सफलता मिलती है और केवल अंग्रेजी शब्दकोश में ही सफलता कर्म से पहले आती है। दुनिया के कई मशहूर लेखकों ने स्वीकारा है कि शुरूआती दिनों में उनके 10 में से 9 काम को नामंजूर कर दिया जाता था। केवल दसवां काम ही स्वीकृत होता था। उनकी सफलता का राज यह है कि उन्होंने तन-मन-धन से 10 गुनी ज्यादा मेहनत की। एक पुरानी कहावत है कि उतना ही खाओ जितना पचा सको। मगर सफलता का सूत्र है कि आप जितना कर सकते हैं उससे भी ज्यादा करें और काम को खत्म करें। हम बहुत सारे दर्दो एवं समस्याओं को लेकर ऎसे कई दर्दो एवं समस्याओं से बच सकते हैं। यदि आप ऎसा महसूस करते हैं कि आप बर्बाद हो गए हैं या टूट गए हैं तो इस बात की प़डताल करनी चाहिए कि आपके प्रयास का स्तर क्या था। मेधावी होना अपने लक्ष्य प्राçप्त के लिए असीमित दर्द झेलने से ज्यादा कुछ भी नहीं है। किसी भी लक्ष्य की प्राçप्त के लिए जिस कठिन परिश्रम की आवश्यकता है, उसके लिए बाहों को घुमाने की जरूरत है, न कि नाक सिको़डने की। कई लोग दावा करते हैं कि वे दो चीजें एक साथ कर सकते हैं, मगर सफलता प्राçप्त के लिए आवश्यक है कि आप एक बार में एक ही काम करें। वास्तव में पसीना सफलता का ईधन है। मार्टिन लूथर किंग ने एक बार कहा था, "यदि किसी व्यक्ति को स़डक साफ करने वाला कहा जाता है तो उसे अपना काम उसी प्रकार करना चाहिए, जैसे माइकल एंजेला चित्रकारी करते थे, बीथओवन धुनें तैयार करते थे या शेक्सपीयर कविता लिखा करते थे। उसे अपना काम इस तरह करना चाहिए कि हर कोई उसके काम की तारीफ में कहे कि यहां एक स़डक साफ करने वाला राजा है जिसने यह काम किया।"

विफलताएं दिखाती हैं सफलता की राह

नई दिल्ली। एक पुरानी कहानी है, एक कौआ जब मोरों को जंगल में नाचते हुए देखता था, तब उसके मन में ख्याल आता था, ""भगवान ने मोरों को कितना सुंदर रूप दिया है! यदि मैं भी ऎसा होता, तो कितना मजा आता!""
कुछ दिनों बाद कौए ने जंगल में मोरों के बहुत से पंख बिखरे देखे। वह खुश होकर बोला, ""भगवान! ब़डी कृपा की आपने, जो मेरी पुकार सुन ली। मैं भी इन पंखों को लगाकर मोर बन जाता हूं।"" उसके बाद कौए ने मोरों के पंख अपने शरीर पर लगा लिए। फिर वह अपना नया रूप देखकर बोला, ""अब मैं मोरों से भी सुंदर हो गया हूं। इसलिए उन्हीं के पास जाकर मस्ती करता हूं।"" वह ब़डे अभियान से मोरों के पास गया। उसे देखते ही मोरों ने ठहाका लगाया, फिर एक मोर ने कहा, ""जरा देखो तो इस बेवकूफ कौए को। यह हमारे फेंके हुए पंख लगाकर मोर बनने चला है। मारो इस बदमाश को चोंचों और पंजों से जोरदार ठोकरें।"" सुनते ही सभी मोर कौए पर टूट प़डे और उसे अधमरा कर दिया। कौआ जान बचाकर कौओं के पास आया और मोरों की शिकायत करने लगा। तब एक बुजुर्ग कौआ बोला, ""सुनते हो इस बेवकूफ की बातें! यह हमारा मजाक उ़डाता था और मोर बनने के लिए उतावला रहता था। इसे इतना भी ज्ञान नहीं कि जो प्राणी अपनी जाति से संतुष्ट नहीं रहता, वह हर जगह अपमान पाता है। आज यह मोरों से पिटने के बाद हमसे मिलने आया है। लगाओं इस धोखेबाज को कसकर मार।"" इतना सुनते ही सभी कौओं ने मिलकर उसकी अच्छी मरम्मत की और कहा, ""अपनी क्षमता को पहचान, वर्ना तू कहीं का नहीं रहेगा।""
इसलिए अपनी क्षमता का आकलन कीजिए और नीचे लिखे गुरूमंत्रों का उच्चाारण कीजिए :
* जीवन की तमाम विफलताएं आपको आपकी वास्तविक योग्यता और क्षमता का आभास कराती हैं, फिर वही विफलताएं आपको सफलता का रास्ता दिखाती हैं।
* प्रभावशाली नेतृत्व क्षमता हासिल करने के लिए अपने प्रतिद्वंदियों के दिमाग में चलने वाली बातों का पता लगाइए ताकि आपको पता चल सके कि उनसे बेहतर आप क्या कर सकते हैंक्
* योग्यता, आत्मविश्वास, साहस, सार्थक संवाद, क्षमता, कठिन परिश्रम और काम के प्रति समर्पण सफलता का सबसे प्रचलित फार्मूला है, जिसके द्वारा दुनिया के करो़डों लोग अमीर बन चुके हैं।
* आपके जीवन की दिशा आपकी इच्छाओं और आवश्यकताओं से तय होती है, क्योंकि कार्य करने की क्षमता आपके संसाधनों पर निर्भर करती है।
* जब आप अपनी क्षमता और रूचि के अनुरूप करियर चुनते हैं, तब प्रतिस्पर्धा आपका मार्गदर्शन करने लगती है।
* कितना भी छोटा बिजनेस क्यों न हो, लेकिन प्रतियोगियों का सही चुनाव सफलता में अहम भूमिका निभाता है। ऎसे में जरूरी है कि आप अपनी क्षमताएं जानें और फिर यह निश्चित करें कि किस यू.एस.पी. के दम पर आप उस क्षेत्र में आना चाहते हैंक्
* बुद्धिजीवी लोग विवेक से सीखते हैं, साधारण लोग अनुभव से सीखते हैं। लेकिन मूर्ख लोग अपनी क्षमताओं से सीखते हैं।
* आपके जीवन की दिशा आपकी इच्छाओं और आवश्यकताओं से तय होती है, क्योंकि कार्य करने की क्षमता आपके संसाधनों पर निर्भर करती है।
* आपको वही दिखायी देता है, जो आप देखना चाहते हैं और वही सुनायी देता है, जो आप सुनना चाहते हैं। क्योंकि आपकी सुनने और देखने की क्षमता विस्तार के लिए तैयार नहीं होती।
* यदि आप अच्छा सा पोर्टफोलियो नहीं बनवाएंगे और निर्माताओं के चक्कर नहीं काटेंगे, तो सिल्वेस्टर स्टेलॉन कैसे बनेंगे। * देने वाले ने कभी कमी नहीं की, अब यह मुकद्दर की बात है कि आपको क्या मिला। प्रकृति ने सबको बराबर बुद्धि से नवाजा है, अब यह आप पर निर्भर करता है कि आपने उसका कितना उपयोग किया।
* आप न तो कालिदास हो सकते हैं, और न ही मोजार्ट। आप आप ही हैं, क्योंकि आप में जन्म से ही अपनी विशिष्ट प्रतिभा है और आप जैसे हैं वैसा और कोई नहीं है।

कल्पनाशीलता, सफलता की पहली सीढ़ी

नई दिल्ली। एक बार गांव वालों ने अपने मुखिया से पूछा, ""इस बार ठंड कैसी प़डेगी। जरा बताओ, ताकि हम उस हिसाब से जलाने के लिए लकडियां इक्कठी कर सकें।"" लेकिन मुखिया नई पीढ़ी का था और कुछ दिनों पहले वह शहर से पढ़कर आया था। इसलिए उसे मौसम का अनुमान लगाने के पारम्परिक तरीके पता नहीं थे।
चूंकि वह मुखिया था, उसे अपना अज्ञान जाहिर करने में ब़डी शर्म आई। फिर उसने एक पल के लिए सोचा और कह दिया, ""इस बार ठंड प़डेगी।""
मुखिया की बात मानकर गांव वालों ने लक़डी जुटानी शुरू कर दी। उसने गोलमोल जवाब तो दे दिया था, पर वह अपने लोगों को सही जानाकरी भी देना चाहता था। इसलिए उसने पास के शहर में स्थित मौसम विभाग से संपर्क किया, फिर पूछा, ""इस बार ठंड के बारे में क्या अनुमान है!""
मौसम विभाग के क्लर्क ने कहा,""अच्छी ठंड पडने के संभावना है।"" मुखिया ने वही बात अपने गांव वालों को फिर बता दी। तब वे और तेजी से लकडियां इक्कठी करने लगे।
लेकिन कुछ दिनों बाद मुखिया ने मौसम के पूर्वानुमान की पुष्टि करनी चाही। उसने शहर जाकर मौसम विभाग से पूछा, ""इस बार सर्दी का मौसम कैसा रहेगा! ""
विभाग ने उत्तर दिया, ""इस बार ब़डी तेज सर्दी प़डने वाली है।"" मुखिया ने आसमान को निहारते हुए कहा, ""सर्दी का मौसम करीब है, लेकिन ठंड प़डने के आसार नही दिखाई प़ड रहे, फिर आप कैसे बोल रहे हैं कि भंयकर ठंड प़डेगी! ""
मौसम विभाग के क्लर्क ने कहा, ""यह मेरी कल्पना है, क्योंकि हम लगातार देख रहे हैं कि इस बार आपके गांव में रहने वाले लोग पागलों की तरह लकडियां इक्कठी कर रहे हैं।""
इसलिए गलत कल्पना मत कीजिए और नीचे लिखे गुरूमंत्रों पर ध्यान दीजिए :
* कल्पनाशीलता सफलता की पहली सीढ़ी है, क्योंकि जोखिम से पहले का गणित बताता है कि आप असफल होंगे, परंतु जोखिम के बाद का समय बताता है कि आप सफल होंगे।
* जब आप किसी चीज को पाने की कल्पना करते हैं, तब आपके अंदर उस चीज को पाने के विचार और भावनाएं उत्पन्न होने लगती हैं। फिर आकर्षण का नियम उस चीज को सच करके आपके पास भेज देता है।
* कल्पना आपको उस दुनिया में ले जाती है जो पहले थी ही नही। परन्तु साकार होते ही वह कल्पना एक नई दुनिया बन जाती है।
* कल्पना, इच्छाशक्ति, भावना, तर्क, अंतरात्मा, स्मरण शक्ति और अवचेतना हमेशा कुछ नया करने को उकसाते हैं, परंतु कुछ लोग उसपर ध्यान नहीं देते। लेकिन जो लोग उनके अनुसार चलते हैं वे सफल हो जाते हैं।
* कल्पना कीजिए कि आपको वैष्णों देवी की चढ़ाई करनी है। लेकिन आपको ऎसी राह नहीं दिख रही, जिसका अनुसरण करके आप पर्वत पर चढ़ते चले जाएं। ऎसी स्थिति में आप अपने सिर को चोटी की ओर उठाएं और तबतक चलते रहें, जबतक कि आप मंदिर के शिखर को न छू लें।
* जब आप अपनी अनुभूतिओं के अनुसार काम करते हैं, तब आपकी एक सीमा होती है। लेकिन जब आप अपनी कल्पना के अनुसार काम करते हैं तब आपकी सीमा अनंत होती है।
* आकर्षण का नियम उन शक्तिशाली तरंगों को ग्रहण करता है, जिसकी आप कल्पना करते हैं। फिर उस कल्पना को साकार करके आपके पास भेज देता है।
* आप कैसे सफलता पा सकते हैं, इसका ब्लूप्रिंट आपके मस्तिष्क की एक कोशिका में छिपा है। लेकिन उसको निकालने के लिए आपको कल्पना रूपी प्रिंटर का इस्तेमाल करना होगा।
* माया सभ्यता के कैलेंडर के हिसाब से जो लोग कल्पना कर रहे हैं कि 2012 में पूरी दुनिया खत्म हो जाएगी, उनको मैं यह बताना चाहता हूं कि दुनिया खत्म नहीं होगी, बल्कि दुनिया में अमीरों की संख्या दोगुनी हो जाएगी।

कामयाबी के लिए चाहिए हिम्मत और जोश

नई दिल्ली। बात उस समय की है, जब हेनरी फोर्ड दुनिया को सबसे सस्ती कार "मॉडल-टी" बनाने की सोच रहे थे। तब कारें तो बहुत बनती थीं, लेकिन सिर्फ राजा-महाराजाओं के लिए ही बनती थीं। हेनरी फोर्ड ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं थे और 14 साल की उम्र के बाद कभी स्कूल नहीं गए थे, उसके बाद भी वह सस्ती गाडियां बनाना चाहते थे।
पहले उन्होंने इंजन की ड्राइंग बनाई, फिर उस जमाने के सबसे अच्छे इंजीनियर के पास गए और उससे अपने लिए इंजन बनाने के लिए कहा। इंजीनियर वी-8 इंजन बनाने के लिए राजी हो गया। फिर कुछ महीनों बाद हेनरी फोर्ड ने इंजीनियर से काम में हो रही प्रगति के बारे में पूछा, तो जवाब मिला कि वी-8 इंजन बनाना असंभव है। इंजीनियर को हिम्मत हारते देख फोर्ड ने उसका हौसला बढ़ाया और खुद उसके साथ काम में लग गए। तब इंजीनियर को हेनरी फोर्ड से प्रेरणा मिली और इंजन वी-8 का डिजाइन तैयार हो गया।
इसलिए प्रेरणा लेते रहिए और इन गुरूमंत्रों को दिल की गहराइयों में उतार लीजिए :
*पे्ररणा से मिलती है कामयाबी, क्योंकि जब आप किसी व्यक्ति से प्रेरित होते हैं, तब आपकी सोई हुई सारी शक्तियां जाग जाती हैं। *आपने कभी सोचा है कि आपका प्रतिद्वंद्वी आपसे ज्यादा सफल व्यापारी क्यों हैं! क्योंकि उसने अपनी स्वाभाविक प्रवृत्ति और अंत: प्रेरणा को पैना किया हुआ है।
*प्रेरणा शब्द की उत्पत्ति अंग्रेजी के "मोटिव" शब्द से हुई है और मोटिव का अर्थ है कारण, लेकिन अमीर शब्द की उत्पत्ति के पीछे कोई कारण नहीं है।
*हिम्मत और जोश से मिलती है सफलता, क्योंकि हिम्मत आपको आगे बढ़ाती है और जोश आपको ज्यादा काम करने की प्रेरणा देता है। *किस्मत में लिखी हर मुश्किल टल जाती है, यदि हो बुलंद हौसले तो मंजिल मिल ही जाती है। सिर उठाकर यदि आसमान को देखोगे बार-बार, तो गगन को छूने की प्रेरणा मिल ही जाती है।
*गीता केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं है, बल्कि उसके अंदर सफलता पाने का विज्ञान छिपा हुआ है, क्योंकि वह आपको संकल्प लेने का सिद्धांत सिखाती है, विरोधियों से निपटने का तरीका बताती है और कर्म करते रहने की प्रेरणा देती है।

दृढ़ संकल्प व परिश्रम में छिपी होती है सफलता

नई दिल्ली। यदि आप अपने क्षेत्र में नेता बनना चाहते हैं तो आपको दीर्घकालीन मानसिक चित्रण के साथ-साथ निर्णय क्षमता भी बढ़ानी होगी। यदि कोई संस्था जो केवल अपने व्यवसाय पर ही केंद्रित रहती है और व्यक्ति के विकास पर ध्यान नहीं देती है तो उसे गंभीर समस्या का सामना करना प़ड सकता है।
व्यक्तियों का विकास भी व्यवसाय के विकास की तरह बहुत मायने रखता है। कोई भी अनुभव के साथ जन्म नहीं लेता। काम करने से अनुभव मिलता है अगर कुछ गलत हो जाए, इच्छित फल न मिल पाए तो उसके लिए व्यक्तियों से पीछा नहीं छु़डाना चाहिए। इसके विपरीत उन्हें प्रक्रिया के बारे में पूरी तरह समझाना चाहिए, ताकि बेहतर नतीजों की अपेक्षा की जा सके। भारत सरकार में विश्वविद्यालयों से निकले छात्र-छात्राओं की भर्ती भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस), भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) या विदेश सेवा आदि में की जाती है। इन लोगों की निश्चित उद्देश्यों की प्राçप्त के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। मैंने 1961 में आईपीएस में दाखिला लिया। 16 महीने के क़डे प्रशिक्षण के बाद मुझे एक साल का अलग-अलग पुलिस श्रेणियों में काम करना प़डा।
फिर मुझे कर्नाटक राज्य के बीजापुर जिले में पुलिस सब डिवीजन का कार्यभार दिया गया। इसी तरह मुझे केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के निदेशक पद तक पहुंचने में 35 साल लग गए। दूसरी ओर, बहुत कम निजी संस्थान अपने प्रबंधकों का हुनर निखारने का प्रयत्न करते हैं। किसी भी व्यवसाय को चलाने के लिए जरूरी है कि वहां काम कर रहे लोगों की क्षमता व हुनर को निखारने का प्रयास भी किया जाए। ब़डे अफसोस से कहना प़डता है कि लोगों के प्रशिक्षण व विकास के लिए बहुत कम निवेश किया जाता है। एक बार अब्राहम लिंकन ने कहा था, ""मुझे पे़ड काटने के लिए छह घंटे दो, मैं पहले चार घंटे तो कुल्ह़ाडी तेज करने में ही लगा दूंगा।"" किसी भी प्रबंधक का कौशल व हुनर निखारने से उसका और संस्था, दोनों का भला होता है। यह कोई ऎसा काम नहीं है कि जिसे आप कभी-कभी करें और भूल जाएं। यह काम तो लगातार करना प़डता है।
कोई कौशल होने के बावजूद आपको लगातार इसका अभ्यास बनाए रखना चाहिए। मैंने एक गायक से उसकी सफलता का राज पूछा तो उसने बताया कि वह अपना सारा समय अभ्यास में लगा देता है। मेरा एक मित्र कॉलेज में ब़डा अच्छा वक्ता था। उसने मुझे बताया कि वह मंच पर आने से पहले घंटों अभ्यास करता था और पूरी संतुष्टि मिलने के बाद ही मंच पर आता था। आत्मविश्वास एक कभी न समाप्त होने वाली प्रक्रिया है। हर व्यक्ति किसी न किसी रूप में स्वयं को बेहतर बनाना चाहता है। इसके लिए उसे लगातार कोशिश करते रहना चाहिए। एक योग्य प्रबंधक अपनी टीम को इतना सक्षम बना देता है कि वह आसानी से संस्था से जु़डे उद्देश्यों की पूर्ति कर सके। आदर्श तौर पर साल भर में कंपनी के 25 प्रतिशत लोग किसी भी समय प्रशिक्षण पर होने चाहिए, ताकि उनके हुनर, कौशल व जानकारी में वृद्धि हो और वे नई तकनीकी जानकारियां भी लें। जबकि अधिकतर संस्थानों से इसे समय व धन की हानि माना जाता है। यहां तक कि सरकार जो कि बहुत ब़डी नियोक्ता है, प्रशिक्षण केंद्रों की नियुक्ति के बारे में उदासीन ही रहती है।
मेरा आईपीएस में एक मित्र था। उसने मुझे बताया कि वह साल में कम से कम तीन माह प्रशिक्षण के लिए जाता है और इस तरह उसने पुलिस अधिकारियों के लिए बने सभी प्रशिक्षण ले लिए हैं। उसने स्वयं बताया कि वह हर काम को सही तरीके से करना पसंद करता है, इसलिए सबको उससे असुविधा होती है। उसे रास्ते से हटाने के लिए नौकरी से निकालना तो मुश्किल होता था इसलिए उसे प्रशिक्षण के लिए भेज दिया जाता था। ऎसा गैर-सरकारी संस्थानों में नहीं होता, जहां केवल बेहतर प्रदर्शन करने वाले ही बच पाते हैं। वे लोग मानव संसाधन विकास के नाम पर कोई खर्चा नहीं करते। सच है कि छोटी संस्थाएं प्रशिक्षण पर ज्यादा खर्च नहीं कर सकतीं, लेकिन वे दूसरी संस्थाओं द्वारा चलाए गए कार्यक्रमों से लाभ उठा सकते हैं। सरकार, सरकारी व निजी संस्थानों में यद्यपि काफी अंतर होता है। कुछ काम ऎसे हैं, जैसे नियम व कानून, पुलिस, न्याय व्यवस्था, पुल व यातायात आदि खर्चीले होने के कारण सरकार को ही करने चाहिए। सरकार के दिमाग में हमेशा लाभ की बात नहीं होती जबकि निजी योजनाएं इसे अपना अहम मुद्दा मानती हैं। दोनों को ही अपने उद्देश्य पाने के लिए यद्यपि श्रेष्ठ संगठनात्मक बल की आवश्यकता होती है। मेहनती, ईमानदार व बुद्धिमान व्यक्ति किसी भी संस्था की सफलता का आधार होते हैं जो कि किसी भी टीम की योग्यता बढ़ाने के लिए जरूरी है। कुछ लोग ऎसे भी होते हैं जो अपने आपमें सुधार लाने की इच्छा-शक्ति ही खो बैठते हैं। संस्था को ऎसे व्यक्तियों के चुनाव में सावधानी बरतनी चाहिए। सीबीआई निदेशक पद पर मुझे एक ऎसा सेक्रेटरी दिया गया जो न तो ठीक से डिक्टेशन ले पाता था और न ही कंप्यूटर चलाना जानता था।
मैंने उससे पूछा तो बोला कि वह छह महीने में ही सेवानिवृत्त होने वाला है, इसलिए उसे कोई नया हुनर सीखने की इच्छा नहीं है। मैंने उसे बताया कि मैं भी उसके कुछ माह बाद सेवानिवृत्त होने वाला हूं। यदि मैं कंप्यूटर सीखकर उसका इस्तेमाल कर सकता हूं तो वह क्यों नहीं कर सकताक् अपना हुनर बढ़ाने की बजाय उसने सेवानिवृत्ति की अवधि तक छुियां ले लीं और घर बैठ गया। मुझे एहसास हुआ कि मैंने एक अनचाहे कर्मचारी से छुटकारा पा लिया। सरकारी नौकरियों में ऎसे कई लोग होते हैं जो कुछ नहीं करते और कुछ सीखना ही नहीं चाहते, उनकी कहीं जरूरत नहीं होती और वे मुफ्त का वेतन पाते हैं। सारी सफलता दृढ़ संकल्प व परिश्रम में छिपी है। हमें ही अपने कामों का उत्तरदायित्व लेना प़डता है। यदि आपने महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपनी जानकारी बढ़ाई तो यह आपके ही काम आएगी। यदि आप जानते हैं कि आप क्या और कैसे कर रहे हैं तो आप सक्षम हो सकते हैं। किसी भी व्यक्ति या संस्था के लिए काम का रचनात्मक माहौल होना जरूरी है। जब लोगों की रचनात्मकता को प्रपत्र मिलता है तो उनकी योग्यता देखते ही बनती है और पूरी टीम संस्था के लक्ष्यों तक पहुंचने के लिए एकजुट हो जाती है। तब ऎसी संस्था से सफलता बहुत दूर नहीं होती।
(लेखक सीबीआई के पूर्व निदेशक हैं। डायमंड पॉकेट बुक्स प्रा. लि., नई दिल्ली से प्रकाशित उनकी पुस्तक "सफलता का जादू" से साभार)