Tuesday, March 8, 2011

कल्पनाशीलता, सफलता की पहली सीढ़ी

नई दिल्ली। एक बार गांव वालों ने अपने मुखिया से पूछा, ""इस बार ठंड कैसी प़डेगी। जरा बताओ, ताकि हम उस हिसाब से जलाने के लिए लकडियां इक्कठी कर सकें।"" लेकिन मुखिया नई पीढ़ी का था और कुछ दिनों पहले वह शहर से पढ़कर आया था। इसलिए उसे मौसम का अनुमान लगाने के पारम्परिक तरीके पता नहीं थे।
चूंकि वह मुखिया था, उसे अपना अज्ञान जाहिर करने में ब़डी शर्म आई। फिर उसने एक पल के लिए सोचा और कह दिया, ""इस बार ठंड प़डेगी।""
मुखिया की बात मानकर गांव वालों ने लक़डी जुटानी शुरू कर दी। उसने गोलमोल जवाब तो दे दिया था, पर वह अपने लोगों को सही जानाकरी भी देना चाहता था। इसलिए उसने पास के शहर में स्थित मौसम विभाग से संपर्क किया, फिर पूछा, ""इस बार ठंड के बारे में क्या अनुमान है!""
मौसम विभाग के क्लर्क ने कहा,""अच्छी ठंड पडने के संभावना है।"" मुखिया ने वही बात अपने गांव वालों को फिर बता दी। तब वे और तेजी से लकडियां इक्कठी करने लगे।
लेकिन कुछ दिनों बाद मुखिया ने मौसम के पूर्वानुमान की पुष्टि करनी चाही। उसने शहर जाकर मौसम विभाग से पूछा, ""इस बार सर्दी का मौसम कैसा रहेगा! ""
विभाग ने उत्तर दिया, ""इस बार ब़डी तेज सर्दी प़डने वाली है।"" मुखिया ने आसमान को निहारते हुए कहा, ""सर्दी का मौसम करीब है, लेकिन ठंड प़डने के आसार नही दिखाई प़ड रहे, फिर आप कैसे बोल रहे हैं कि भंयकर ठंड प़डेगी! ""
मौसम विभाग के क्लर्क ने कहा, ""यह मेरी कल्पना है, क्योंकि हम लगातार देख रहे हैं कि इस बार आपके गांव में रहने वाले लोग पागलों की तरह लकडियां इक्कठी कर रहे हैं।""
इसलिए गलत कल्पना मत कीजिए और नीचे लिखे गुरूमंत्रों पर ध्यान दीजिए :
* कल्पनाशीलता सफलता की पहली सीढ़ी है, क्योंकि जोखिम से पहले का गणित बताता है कि आप असफल होंगे, परंतु जोखिम के बाद का समय बताता है कि आप सफल होंगे।
* जब आप किसी चीज को पाने की कल्पना करते हैं, तब आपके अंदर उस चीज को पाने के विचार और भावनाएं उत्पन्न होने लगती हैं। फिर आकर्षण का नियम उस चीज को सच करके आपके पास भेज देता है।
* कल्पना आपको उस दुनिया में ले जाती है जो पहले थी ही नही। परन्तु साकार होते ही वह कल्पना एक नई दुनिया बन जाती है।
* कल्पना, इच्छाशक्ति, भावना, तर्क, अंतरात्मा, स्मरण शक्ति और अवचेतना हमेशा कुछ नया करने को उकसाते हैं, परंतु कुछ लोग उसपर ध्यान नहीं देते। लेकिन जो लोग उनके अनुसार चलते हैं वे सफल हो जाते हैं।
* कल्पना कीजिए कि आपको वैष्णों देवी की चढ़ाई करनी है। लेकिन आपको ऎसी राह नहीं दिख रही, जिसका अनुसरण करके आप पर्वत पर चढ़ते चले जाएं। ऎसी स्थिति में आप अपने सिर को चोटी की ओर उठाएं और तबतक चलते रहें, जबतक कि आप मंदिर के शिखर को न छू लें।
* जब आप अपनी अनुभूतिओं के अनुसार काम करते हैं, तब आपकी एक सीमा होती है। लेकिन जब आप अपनी कल्पना के अनुसार काम करते हैं तब आपकी सीमा अनंत होती है।
* आकर्षण का नियम उन शक्तिशाली तरंगों को ग्रहण करता है, जिसकी आप कल्पना करते हैं। फिर उस कल्पना को साकार करके आपके पास भेज देता है।
* आप कैसे सफलता पा सकते हैं, इसका ब्लूप्रिंट आपके मस्तिष्क की एक कोशिका में छिपा है। लेकिन उसको निकालने के लिए आपको कल्पना रूपी प्रिंटर का इस्तेमाल करना होगा।
* माया सभ्यता के कैलेंडर के हिसाब से जो लोग कल्पना कर रहे हैं कि 2012 में पूरी दुनिया खत्म हो जाएगी, उनको मैं यह बताना चाहता हूं कि दुनिया खत्म नहीं होगी, बल्कि दुनिया में अमीरों की संख्या दोगुनी हो जाएगी।

कामयाबी के लिए चाहिए हिम्मत और जोश

नई दिल्ली। बात उस समय की है, जब हेनरी फोर्ड दुनिया को सबसे सस्ती कार "मॉडल-टी" बनाने की सोच रहे थे। तब कारें तो बहुत बनती थीं, लेकिन सिर्फ राजा-महाराजाओं के लिए ही बनती थीं। हेनरी फोर्ड ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं थे और 14 साल की उम्र के बाद कभी स्कूल नहीं गए थे, उसके बाद भी वह सस्ती गाडियां बनाना चाहते थे।
पहले उन्होंने इंजन की ड्राइंग बनाई, फिर उस जमाने के सबसे अच्छे इंजीनियर के पास गए और उससे अपने लिए इंजन बनाने के लिए कहा। इंजीनियर वी-8 इंजन बनाने के लिए राजी हो गया। फिर कुछ महीनों बाद हेनरी फोर्ड ने इंजीनियर से काम में हो रही प्रगति के बारे में पूछा, तो जवाब मिला कि वी-8 इंजन बनाना असंभव है। इंजीनियर को हिम्मत हारते देख फोर्ड ने उसका हौसला बढ़ाया और खुद उसके साथ काम में लग गए। तब इंजीनियर को हेनरी फोर्ड से प्रेरणा मिली और इंजन वी-8 का डिजाइन तैयार हो गया।
इसलिए प्रेरणा लेते रहिए और इन गुरूमंत्रों को दिल की गहराइयों में उतार लीजिए :
*पे्ररणा से मिलती है कामयाबी, क्योंकि जब आप किसी व्यक्ति से प्रेरित होते हैं, तब आपकी सोई हुई सारी शक्तियां जाग जाती हैं। *आपने कभी सोचा है कि आपका प्रतिद्वंद्वी आपसे ज्यादा सफल व्यापारी क्यों हैं! क्योंकि उसने अपनी स्वाभाविक प्रवृत्ति और अंत: प्रेरणा को पैना किया हुआ है।
*प्रेरणा शब्द की उत्पत्ति अंग्रेजी के "मोटिव" शब्द से हुई है और मोटिव का अर्थ है कारण, लेकिन अमीर शब्द की उत्पत्ति के पीछे कोई कारण नहीं है।
*हिम्मत और जोश से मिलती है सफलता, क्योंकि हिम्मत आपको आगे बढ़ाती है और जोश आपको ज्यादा काम करने की प्रेरणा देता है। *किस्मत में लिखी हर मुश्किल टल जाती है, यदि हो बुलंद हौसले तो मंजिल मिल ही जाती है। सिर उठाकर यदि आसमान को देखोगे बार-बार, तो गगन को छूने की प्रेरणा मिल ही जाती है।
*गीता केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं है, बल्कि उसके अंदर सफलता पाने का विज्ञान छिपा हुआ है, क्योंकि वह आपको संकल्प लेने का सिद्धांत सिखाती है, विरोधियों से निपटने का तरीका बताती है और कर्म करते रहने की प्रेरणा देती है।

दृढ़ संकल्प व परिश्रम में छिपी होती है सफलता

नई दिल्ली। यदि आप अपने क्षेत्र में नेता बनना चाहते हैं तो आपको दीर्घकालीन मानसिक चित्रण के साथ-साथ निर्णय क्षमता भी बढ़ानी होगी। यदि कोई संस्था जो केवल अपने व्यवसाय पर ही केंद्रित रहती है और व्यक्ति के विकास पर ध्यान नहीं देती है तो उसे गंभीर समस्या का सामना करना प़ड सकता है।
व्यक्तियों का विकास भी व्यवसाय के विकास की तरह बहुत मायने रखता है। कोई भी अनुभव के साथ जन्म नहीं लेता। काम करने से अनुभव मिलता है अगर कुछ गलत हो जाए, इच्छित फल न मिल पाए तो उसके लिए व्यक्तियों से पीछा नहीं छु़डाना चाहिए। इसके विपरीत उन्हें प्रक्रिया के बारे में पूरी तरह समझाना चाहिए, ताकि बेहतर नतीजों की अपेक्षा की जा सके। भारत सरकार में विश्वविद्यालयों से निकले छात्र-छात्राओं की भर्ती भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस), भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) या विदेश सेवा आदि में की जाती है। इन लोगों की निश्चित उद्देश्यों की प्राçप्त के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। मैंने 1961 में आईपीएस में दाखिला लिया। 16 महीने के क़डे प्रशिक्षण के बाद मुझे एक साल का अलग-अलग पुलिस श्रेणियों में काम करना प़डा।
फिर मुझे कर्नाटक राज्य के बीजापुर जिले में पुलिस सब डिवीजन का कार्यभार दिया गया। इसी तरह मुझे केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के निदेशक पद तक पहुंचने में 35 साल लग गए। दूसरी ओर, बहुत कम निजी संस्थान अपने प्रबंधकों का हुनर निखारने का प्रयत्न करते हैं। किसी भी व्यवसाय को चलाने के लिए जरूरी है कि वहां काम कर रहे लोगों की क्षमता व हुनर को निखारने का प्रयास भी किया जाए। ब़डे अफसोस से कहना प़डता है कि लोगों के प्रशिक्षण व विकास के लिए बहुत कम निवेश किया जाता है। एक बार अब्राहम लिंकन ने कहा था, ""मुझे पे़ड काटने के लिए छह घंटे दो, मैं पहले चार घंटे तो कुल्ह़ाडी तेज करने में ही लगा दूंगा।"" किसी भी प्रबंधक का कौशल व हुनर निखारने से उसका और संस्था, दोनों का भला होता है। यह कोई ऎसा काम नहीं है कि जिसे आप कभी-कभी करें और भूल जाएं। यह काम तो लगातार करना प़डता है।
कोई कौशल होने के बावजूद आपको लगातार इसका अभ्यास बनाए रखना चाहिए। मैंने एक गायक से उसकी सफलता का राज पूछा तो उसने बताया कि वह अपना सारा समय अभ्यास में लगा देता है। मेरा एक मित्र कॉलेज में ब़डा अच्छा वक्ता था। उसने मुझे बताया कि वह मंच पर आने से पहले घंटों अभ्यास करता था और पूरी संतुष्टि मिलने के बाद ही मंच पर आता था। आत्मविश्वास एक कभी न समाप्त होने वाली प्रक्रिया है। हर व्यक्ति किसी न किसी रूप में स्वयं को बेहतर बनाना चाहता है। इसके लिए उसे लगातार कोशिश करते रहना चाहिए। एक योग्य प्रबंधक अपनी टीम को इतना सक्षम बना देता है कि वह आसानी से संस्था से जु़डे उद्देश्यों की पूर्ति कर सके। आदर्श तौर पर साल भर में कंपनी के 25 प्रतिशत लोग किसी भी समय प्रशिक्षण पर होने चाहिए, ताकि उनके हुनर, कौशल व जानकारी में वृद्धि हो और वे नई तकनीकी जानकारियां भी लें। जबकि अधिकतर संस्थानों से इसे समय व धन की हानि माना जाता है। यहां तक कि सरकार जो कि बहुत ब़डी नियोक्ता है, प्रशिक्षण केंद्रों की नियुक्ति के बारे में उदासीन ही रहती है।
मेरा आईपीएस में एक मित्र था। उसने मुझे बताया कि वह साल में कम से कम तीन माह प्रशिक्षण के लिए जाता है और इस तरह उसने पुलिस अधिकारियों के लिए बने सभी प्रशिक्षण ले लिए हैं। उसने स्वयं बताया कि वह हर काम को सही तरीके से करना पसंद करता है, इसलिए सबको उससे असुविधा होती है। उसे रास्ते से हटाने के लिए नौकरी से निकालना तो मुश्किल होता था इसलिए उसे प्रशिक्षण के लिए भेज दिया जाता था। ऎसा गैर-सरकारी संस्थानों में नहीं होता, जहां केवल बेहतर प्रदर्शन करने वाले ही बच पाते हैं। वे लोग मानव संसाधन विकास के नाम पर कोई खर्चा नहीं करते। सच है कि छोटी संस्थाएं प्रशिक्षण पर ज्यादा खर्च नहीं कर सकतीं, लेकिन वे दूसरी संस्थाओं द्वारा चलाए गए कार्यक्रमों से लाभ उठा सकते हैं। सरकार, सरकारी व निजी संस्थानों में यद्यपि काफी अंतर होता है। कुछ काम ऎसे हैं, जैसे नियम व कानून, पुलिस, न्याय व्यवस्था, पुल व यातायात आदि खर्चीले होने के कारण सरकार को ही करने चाहिए। सरकार के दिमाग में हमेशा लाभ की बात नहीं होती जबकि निजी योजनाएं इसे अपना अहम मुद्दा मानती हैं। दोनों को ही अपने उद्देश्य पाने के लिए यद्यपि श्रेष्ठ संगठनात्मक बल की आवश्यकता होती है। मेहनती, ईमानदार व बुद्धिमान व्यक्ति किसी भी संस्था की सफलता का आधार होते हैं जो कि किसी भी टीम की योग्यता बढ़ाने के लिए जरूरी है। कुछ लोग ऎसे भी होते हैं जो अपने आपमें सुधार लाने की इच्छा-शक्ति ही खो बैठते हैं। संस्था को ऎसे व्यक्तियों के चुनाव में सावधानी बरतनी चाहिए। सीबीआई निदेशक पद पर मुझे एक ऎसा सेक्रेटरी दिया गया जो न तो ठीक से डिक्टेशन ले पाता था और न ही कंप्यूटर चलाना जानता था।
मैंने उससे पूछा तो बोला कि वह छह महीने में ही सेवानिवृत्त होने वाला है, इसलिए उसे कोई नया हुनर सीखने की इच्छा नहीं है। मैंने उसे बताया कि मैं भी उसके कुछ माह बाद सेवानिवृत्त होने वाला हूं। यदि मैं कंप्यूटर सीखकर उसका इस्तेमाल कर सकता हूं तो वह क्यों नहीं कर सकताक् अपना हुनर बढ़ाने की बजाय उसने सेवानिवृत्ति की अवधि तक छुियां ले लीं और घर बैठ गया। मुझे एहसास हुआ कि मैंने एक अनचाहे कर्मचारी से छुटकारा पा लिया। सरकारी नौकरियों में ऎसे कई लोग होते हैं जो कुछ नहीं करते और कुछ सीखना ही नहीं चाहते, उनकी कहीं जरूरत नहीं होती और वे मुफ्त का वेतन पाते हैं। सारी सफलता दृढ़ संकल्प व परिश्रम में छिपी है। हमें ही अपने कामों का उत्तरदायित्व लेना प़डता है। यदि आपने महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपनी जानकारी बढ़ाई तो यह आपके ही काम आएगी। यदि आप जानते हैं कि आप क्या और कैसे कर रहे हैं तो आप सक्षम हो सकते हैं। किसी भी व्यक्ति या संस्था के लिए काम का रचनात्मक माहौल होना जरूरी है। जब लोगों की रचनात्मकता को प्रपत्र मिलता है तो उनकी योग्यता देखते ही बनती है और पूरी टीम संस्था के लक्ष्यों तक पहुंचने के लिए एकजुट हो जाती है। तब ऎसी संस्था से सफलता बहुत दूर नहीं होती।
(लेखक सीबीआई के पूर्व निदेशक हैं। डायमंड पॉकेट बुक्स प्रा. लि., नई दिल्ली से प्रकाशित उनकी पुस्तक "सफलता का जादू" से साभार)

हम सभी अपने आप में हैं विलक्षण

नई दिल्ली। हालात चाहे जो भी हों, अपनी मानसिकता व नजरिया को प्रसन्न और शांत बनाए रखें। स़डक पर ट्रैफिक न मिले, अच्छी धूप निकल जाए या आपको अच्छे प़डोसी मिल जाएं तो ऎसी छोटी-छोटी बातों के लिए भी आभार व्यक्त करें।
अपने आसपास नजर दौ़डाएं तो आपको पता चलेगा कि ईश्वर ने आपको कैसी-कैसी और कितनी सुविधाएं दी हैं। टी.वी., घरेलू उपकरण, बिजली, पानी आदि की आज से पचास वर्ष पूर्व तक कितनी किल्लत थी। मुझे याद है कि जब मैंने 1980 में वीसीडी पर पहली फिल्म देखी तो मुझे यह किसी अजूबे से कम नहीं लगा था। ऎसा लगता था कि हमें घर में ही थिएटर की सुविधा मिल गई। मोबाइल फोन को ही लें, यह तो आम आदमी की पहुंच से कहीं ऊपर था। कार, रेल, वायुयान, स्कूटर आदि ने हमारे जीवन की गुणवत्ता पर गहरा असर डाला है। प्रतिदिन पांच ऎसी वस्तुओं की सूची बनाएं, जिनके लिए आप धन्यवाद देना चाहते हों। दूसरों की तारीफ करें, ताकि वह बेहतर तरीके से काम कर पाए।
मैंने नोट किया कि जब मैं अपने सेक्रेटरी की तारीफ करता हूं तो वह न केवल खुश होता है, बल्कि उसकी कार्यक्षमता भी दुगनी हो जाती है। मैं स्टाफ की गलतियां निकालते समय किसी तरह निजी रूप से दोषारोपण नहीं करता, क्योंकि मैं जानता हूं नकारात्मकता आपको लोगों से दूर ले जाती है। इस संसार में रोमांचक यात्रा का भरपूर आनंद लें और याद रखें कि असफलता ही सफलता तक पहुंचने की सबसे पहली सीढ़ी है। असफल हुए बिना आप सफल होने का तरीका सीख ही नहीं सकते। किसी व्यक्ति के पास यदि साइकिल हो तो मोटरसाइकिल खरीदना उसके लिए ब़डी बात हो सकती है। अपने जीवन में कुछ ऎसे हुनर भी सीखें, जो आपको लगता है कि आप कभी नहीं कर सकते। आपको ज्यादा ऊंचे स्तर पर रचनात्मक होने की आवश्यकता नहीं है। जीवन में सफलता पाने के लिए आपको कुछ न कुछ करना ही होगा। आप पूछेंगे कि कौन से काम, कब, कहां और कैसे किए जाएंक् इन प्रश्नों का उत्तर जानना कठिन नहीं है।
उत्तर इसी बात में छिपा है कि आप जीवन में क्या करना चाहते हैं और किस तरह का जीवन जीना चाहते हैं, नए-नए विचारों पर काम करें, नए-नए तरीके आजमाएं और यह जानने की कोशिश करें कि आपके लिए क्या बेहतर हो सकता हैक् हमें अहसास होना चाहिए कि हम सभी अपने आप में विलक्षण हैं, इसलिए हम सब का उद्देश्य केवल इतना होना चाहिए कि हम बढि़या से बढि़या और बेहतर से बेहतर प्रदर्शन करें।
(लेखक सीबीआई के पूर्व निदेशक हैं। डायमंड पॉकेट बुक्स प्रा. लि., नई दिल्ली से प्रकाशित उनकी पुस्तक "सफलता का जादू" से साभार)

crual deed in New Delhi


A large number of women protest  demanding arrest of the killer of a 21-year-old girl, who was shot dead outside her college in the national capitalof India On International Women's Day.....
Why crime nt stop against women ?

गद्दाफी को देश छोड़ने 72 घंटे का समय, ईरान दे सकता है शरण


त्रिपोली. लीबिया के तानाशाह मुअम्मर गद्दाफी को विद्रोहियों ने देश छोड़ने के लिए 72 घंटे का समय दिया है। माना जा रहा है कि गद्दाफी गद्दी छोड़ने के लिए तैयार हो गए हैं लेकिन उन्होंने कुछ शर्तें रखी हैं। गद्दाफी के ईरान, वेनेजुएला, क्यूबा जैसे देशों से बेहतर संबंध हैं और यदि वे देश छोड़ते हैं तो उनके इन देशों में शरण लेने की संभावना है।

कहां शरण ले सकते हैं गद्दाफी

हालांकि विश्व के अधिकांश देश तानाशाह मुअम्मर गद्दाफी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के पक्ष में हैं, ईरान और लेटिन अमेरिका के कम से कम तीन देश, वेनेजुएला, निकारागुआ और क्यूबा उन्हें देस छोड़ने की स्थिति में शरण दे सकते हैं। मुअम्मर गद्दाफी का अमेरिका विरोधी देशों से बेहतर तालमेल है। हाल ही में ईरान ने धमकी दी है कि यदि पश्चिमी देशों ने लीबिया पर सैन्य कार्रवाई की तो उन्हें इसके परिणाम भुगतने होंगे। ईरान के राष्ट्रपति मोहम्मद अहमदनेजाद के अमेरिका से सामान्य संबंध नहीं हैं। उन्होंने धमकी दी कि यदि लीबिया पर हमला हुआ तो वहां अमेरिकी सैनिकों की कब्रगाह बना दी जाएगी।

लीबिया की सरकार ने लेटिन अमेरिका के कुछ देशों से काफी गहरे आर्थिक और व्यापारिक संबंध विकसित किए हैं। गद्दाफी के इन देशों के प्रमुखों से व्यक्तिगत संबंध हैं। लेटिन अमेरिका के ही कुछ देश गद्दाफी के विरोध में हैं, लेकिन करीब तीन देशों से उनके व्यक्तिगत संबंध हैं। पेरू लीबिया के विरोध में है। ब्राजील ने लीबिया के मामले में चुप्पी साध रखी है। ब्राजील के भी लीबिया से गहरे व्यापारिक संबंध हैं।

निकारागुआ के नेता डेनियल ओरटेगा ने सबसे पहले गद्दाफी के पक्ष में आवाज उठाई। माना जाता है कि लीबिया ने निकारागुआ और क्यूबा को बड़े पैमाने पर ब्याजमुक्त ऋण दिया है। वेनेजुएला के राष्ट्रपति हुगो चवेज ने लीबिया से पिछले कुछ सालों में 150 से ज्यादा समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। इन दोनों नेताओं का व्यक्तिगत रूप से भी बेहतर तालमेल है। वेनेजुएला के राष्ट्रपति हुगो चवेज ने हाल ही में लीबिया में मध्यस्थता का प्रस्ताव दिया था, जिसे जनता ने ठुकरा दिया।

गद्दाफी को 72 घंटे का समय
जनता का नेतृत्व कर रही नेशनल लीबियन काउंसिल के नेता अब्देल जलील ने कहा है कि यदि गद्दाफी नहीं चाहते कि उनके खिलाफ युद्ध अपराध के मामले चलाए जाएं, तो वे 72 घंटे में देश छोड़ दें। उन्होंने कहा कि यदि गद्दाफी 72 घंटों में देश छोड़ दें, जनता पर बमबारी बंद करें तो जनता भी उन पर युद्ध अपराध चलाने के लिए दबाव नहीं डालेगी। जनता के कुछ नेताओं ने कहा है कि गद्दाफी ने उनके पास सूचना भेजी है कि वे परिवार सहित देश छोड़ने को तैयार हैं, लेकिन उनकी कुछ शर्तें हैं। हालांकि सरकार ने इन दावों का खंडन किया है। 

इसी बीच त्रिपोली में सरकार विरोधी और समर्थकों में युद्ध काफी तेज हो गया है। गद्दाफी समर्थक सेनाओं ने जनता के कब्जे वाले शहरों पर नियंत्रण करने के लिए दो दिन पहले नए सिरे से हमले शुरु किए, जो अभी भी जारी हैं। जनता भी पूर्व और पश्चिमी क्षेत्रों में अपने गढ़ बचाने का प्रयास कर रही है। गद्दाफी समर्थकों ने लीबिया के पश्चिमी क्षेत्र में नए सिरे से बड़ा हमला बोला है।

गद्दाफी देश छोड़ने को राजी?
एक टीवी चैनल के अनुसार मुअम्मर गद्दाफी ने देश छोड़ने का प्रस्ताव दिया है। गद्दाफी के अनुसार इसके लिए लीबियाई संसद की बैठक बुलाई जाए, जिसमें वे इस संबंध में घोषणा करेंगे। इसके अलावा उन पर युद्ध अपराध संबंधी कोई मुकदमा नहीं चलाया जाए और बड़ी रकम लेकर देश के बाहर जाने दिया जाए। हालांकि विद्रोही काउंसिल ने प्रस्ताव को नकार दिया है और कहा है कि यह गद्दाफी के खिलाफ चल रहे आंदोलन में मारे गए लोगों का अपमान होगा। गद्दाफी ने पूर्व प्रधानमंत्री जदल्लाह ताल्ही को ये प्रस्ताव लेकर काउंसिल के पास भेजा था।

ऐसी तस्वीरें देख उड़ गई कितनों की नींद!

एक पुरुष मैग्जीन के कवर पेज पर ब्लैक बिकनी में अपनी तस्वीर देखकर अभिनेत्री विद्या बालन भी आश्चर्य में हैं। खबर है कि फोटो में कुछ बदलाव करके ये हरकत की गई है। अब विद्या उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई का मन बना रही हैं।

विद्या बालन अकेली ऐसी अभिनेत्री नहीं हैं जिनकी तस्वीर को मॉर्फ करके लगाया गया है। इसके पहले भी कई अभिनेत्रियां इस तरह की छेड़छाड़ से बदनाम हो चुकी हैं।

सन् 1997 में अभिनेत्री पूजा भट्ट की स्टार मैग्जीन ने ऐसी ही फेक (बनावटी) न्यूड तस्वीर प्रकाशित कर दी थी। इसी तरह हाल ही में सोनाक्षी सिन्हा की बिकनी में आई फोटो ने भी फिल्म इंडस्ट्री में तहलका मचा दिया था।

मल्लिका शेरावत और प्रीति जिंटा भी इस तरह के विवाद का सामना कर चुकी हैं। कुछ लोगों ने इनकी मॉर्फ क्लिप वेब पर प्रकाशित कर दी थी।

एक लोकप्रिय और गिज्मा गैजेट साइट ने अपने प्रोडक्ट को चर्चा में लाने के लिए सैलिना जेटली की भी तस्वीर से छेड़छाड़ कर उसे प्रकाशित कर दिया था।

इसी तरह दक्षिण भारत की चर्चित अभिनेत्री खुशबू की भी रेड बिकनी में प्रकाशित फोटो ने भी काफी सुर्खियां बटोरी थीं। इसके बाद खूशबू ने कानून का सहारा भी लिया था।

24 घंटे बाद भी राधिका के कातिल का कोई सुराग नहीं

नई दिल्ली। दिल्ली में छात्रा की हत्या हुए करीब 24 घंटे बीत चुके हैं, लेकिन दिल्ली पुलिस के पास कातिल का कोई सुराग नहीं है। वैसे पुलिस का कहना है कि लड़की के मोबाइल डिटेल्स की पड़ताल की जा रही है और कई लोगों से पूछताछ जारी है।
दरअसल 8 मार्च यानि अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर सुबह के 10 बजे धौलाकुआं के पास फुटओवर ब्रिज पर राधिका तंवर नाम की लड़की की सरेआम गोली मार दी गई थी। गोली मारने के बाद बेखौफ अपराधी वहां से फरार हो गया। 22 वर्षीय राधिका दिल्ली युनिवर्सिटी के रामलाल आनंद कॉलेज में बीए सेकेंड ईयर की छात्रा थी। लड़की नारायणा गांव की रहने वाली थी। घरवालों को जैसे ही बेटी पर हुए हमले की खबर मिली वो घबराए अस्पताल पहुंचे। लेकिन तबतक देर हो चुकी थी।
राधिका हर रोज की तरह कॉलेज जा रही थी। चश्मदीदों के मुताबिक एक लड़का राधिका का पीछा कर रहा था और जैसे ही वो फुटओवर ब्रिज पर पहुंची उसे पीछे से गोली मारकर वो फरार हो गया। मौके पर मौजूद लोगों ने घायल राधिका को ऑटो में बिठाया और एम्स ट्रॉमा सेंटर ले गए। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है लेकिन हत्या की वजह अभी तक साफ नहीं हो पाई है। इस घटना से दिल्ली युनिवर्सिटी के साउथ कैंपस में खलबली मच गई है। जिस फुटओवर ब्रिज पर लड़की को गोली मारी गई है उसे साउथ कैंपस ब्रिज के नाम से जाना जाता है।

रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) के खिलाफ कानूनी कार्यवाही

ईटी नाउ : शेयर बाजार नियामक सेबी ने प्रमोटरों की हिस्सेदारी बढ़ाने संबंधी नियमों के उल्लंघन के
मामले में रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) के खिलाफ कानूनी कार्यवाही शुरू कर दी है। यह मामला तकरीबन रिलायंस इंडस्ट्री के 11 साल पुराने पुराने सौदे से जुड़ा है। अगर हम इस मामले में सेबी के आरोपों की बात करें तो यह मामला तकनीकी जान पड़ता है। इस मामले का सारांश यह है कि आरआईएल के प्रमोटरों ने साल 2000 में सार्वजनिक जानकारी दिए बगैर कंपनी में अपनी हिस्सेदारी 5 फीसदी से ज्यादा बढ़ा ली। यह हिस्सेदारी नॉन-कनवर्टिबल डिबेंचरों (एनसीडी) से जुड़े वारंट कनवर्जन के जरिए बढ़ाई गई। ये एनसीडी और पुराने थे और इन्हें 1994 में जारी किया गया था।

मामले की जांच कर रहे सेबी अधिकारी पीयूष गुप्ता ने इस संबंध में 24 फरवरी को नोटिस जारी किया था। आरआईएल के पास इस केस में अपनी बात रखने का विकल्प है। साथ ही, कंपनी को कथित सहमति पत्र (कॉन्सेन्ट एप्लिकेशन) भी दायर करने का अधिकार दिया गया है। सहमति पत्र के जरिए अनियमितता के लिए दोषी पाई गई कंपनी अपराध स्वीकार या इनकार किए बगैर फीस देकर मामले को रफा-दफा कर सकती है। नोटिस में कहा गया है कि इस मामले में कानूनी कार्यवाही जारी रहेगी और सहमति कार्यवाही के खत्म या खारिज होने के बाद उचित आदेश जारी किए जाएंगे।

सेबी के अधिकारी द्वारा 24 फरवरी को जारी किए गए नोटिस में कहा गया है कि साल 2000 में आरआईएल ने अपने प्रमोटरों से जुड़ी 38 इकाइयों को 12 करोड़ शेयर जारी किए थे और यह अधिग्रहण से जुड़े दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है। सेबी के मुताबिक, आरआईएल द्वारा 38 इकाइयों को व्यक्ति के रूप में शेयर जारी किए जाने के बाद 31 मार्च 2000 को कंपनी में प्रमोटरों की हिस्सेदारी बढ़कर 38.33 फीसदी हो गई, जो 31 मार्च 1999 को 22.17 फीसदी थी। सेबी के टेकओवर नियमों के मुताबिक, प्रमोटरों को कंपनी में अपनी होल्डिंग सालाना 5 फीसदी तक बढ़ाने की इजाजत दी गई थी।

चूंकि, आरआईएल के प्रमोटरों ने अपनी हिस्सेदारी एक साल के भीतर 5 फीसदी से ज्यादा बढ़ा ली, लिहाजा सेबी के नियम 11 (1) के तहत उनके लिए इस संबंध में सार्वजनिक जानकारी मुहैया कराना जरूरी था। हालांकि, ये शेयर प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट के तहत जारी किए गए थे, जिसे टेकओवर नियमों से छूट मिली हुई है, लेकिन हिस्सेदारी खरीदने वाले को इस संबंध में रिपोर्ट फाइल करनी थी। लेकिन न तो आरआईएल प्रमोटरों और न ही संबधित इकाइयों ने इस बारे में रिपोर्ट दाखिल की और न ही टेकओवर नियमों के तहत छूट के लिए आवेदन दिया।

इस बारे में जब रिलायंस इंडस्ट्रीज के प्रवक्ता से बात करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने कुछ भी कहने से मना कर दिया। अगर इस मामले में दोष सिद्ध हो जाता है तो आरआईएल के प्रमोटरों पर मौद्रिक जुर्माना लगाया जा सकता है। दरअसल, जनवरी 2000 में 75 रुपए के हिसाब से 38 इकाईयों को 12 करोड़ शेयर जारी किए गए थे। ये शेयर वारंट के जरिए नॉन-कनवर्टिबल डिबेंचर (एनसीडी

दुनिया की शीर्ष 100 प्रेरक महिलाओं में पांच भारतीय महिलाएं

लंदन। समाचार पत्र द गार्जियन ने दुनिया की शीर्ष 100 प्रेरक महिलाओं की सूची तैयार की है। द गार्जियन ने आठ मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर यह सूची जारी की। इनमें भारतीय महिलाओं में मानवाधिकार कार्यकर्ता जयश्री सतपते, बुकर पुरस्कार विजेता अरूंधति रॉय, पर्यावरणविद् वंदना शिवा, महिला अधिकारों के लिए आवाज उठाने वाली अपराजिता गोगोई और सम्पत पाल देवी शामिल है।
सम्पत पाल देवी उत्तर भारत में गुलाबी गैंग का नेतृत्व करती है, जो घरेलू हिंसा का विरोध करता है। इस समूह की सभी महिलाएं गुलाबी साडी पहनती है और इसमें अभी 20,000 सदस्य है। एक दिन अपने राज्य उत्तर प्रदेश में उन्होंने एक व्यक्ति को पत्नी को पीटते देखा। उन्होंने उसे ऎसा न करने के लिए कहा, लेकिन वह नहीं माना। अगले दिन वह कई महिलाओं को लेकर आई और उस व्यक्ति की उसी तरह पिटाई की, जैसे उसने अपनी पत्नी को पीटा था।

Monday, March 7, 2011

चाहिए ब़डी कामयाबी तो जोखिम उठाइए

नई दिल्ली। एक राजा था, उसे अपनी दौलत और ताकत पर बहुत घमंड था। वह हालांकि दानी, ईमानदार और योग्य प्रशासक था, लेकिन अपने अहंकार के कारण वह बदनाम हो गया था। एक दिन राजा सोचने लगा कि मैं अपनी प्रजा का पूरा ध्यान रखता हूं, फिर भी प्रजा मुझसे खुश नहीं है, ऎसा क्यों हो रहा है!
फिर उस राजा को जानने के लिए वह संत बाबा गरीबदास के पास पहुंचा और बोला, ""बाबा मैं इस देश का राजा हूं, मेरे पास बेइंतहा दौलत है। यदि आपको किसी चीज की जरूरत हो, तो तुरंत बताइए, मैं वो चीज पलक झपकते ही आपकी सेवा में पेश कर दूंगा।""
बाबा उसके अहंकार को भांप गए और बोले, ""तुम्हारे पास अपना है क्या, जो मुझे दोगे!""
बाबा की बात सुनकर राजा चौंक गया, फिर बोला, ""बाबा, ऎसी कौन-सी चीज है, जो मेरे पास नहीं हैक् मेरा महल कीमती चीजों से भरा प़डा है।""
बाबा गुस्से में बोले, ""राजन, यह तुम्हारा भ्रम है कि सारी दौलत तुम्हारी है। तुम्हारा कुछ भी नहीं है, क्योंकि तुम्हारा शरीर और सौंदर्य तुम्हारे माता-पिता का दिया हुआ है। वैभव धरती माता का दिया हुआ है। राजपाट भी तुम्हारा नहीं है, प्रजा ने तुम्हें राजा बनाया है। यदि तुम्हारा अपना कुछ है, तो वो है धर्म! इसलिए धर्म का पालन करो और प्रजा की सेवा करो, फिर तुम युगों-युगों तक अमर हो जाओगो।""
बाबा के मुंह से धर्म का रहस्य जानकर राजा का अहंकार चूर-चूर हो गया, फिर उसे अपनी परेशानी का कारण भी समझ में आ गया।
वह बाबा के चरणों में गिर प़डा और हाथ जो़डकर बोला, ""बाबा, मैं आपकी बात को ध्यान में रखते हुए अब अपने शासन में धर्म को ही प्रमुख स्थान दूंगा और कभी भी अहंकार नहीं करूंगा।""
इसलिए हमेशा प्रगति के बारे में सोचिए और इन गुरूमंत्रों को बार-बार दोहराइए :
* यह मत सोचिए कि देश की अर्थव्यवस्था कब समृद्ध होगी, बल्कि यह सोचिए कि आप की अपनी अर्थव्यवस्था कैसे समृद्ध होगी!
* सफलता हमेशा असफलताओं के बाद ही मिलती है, क्योंकि सफलता का रास्ता असफलताओं के बीच से ही होकर गुजरता है।
* यदि आपके पास एक पेन और एक सपना है, तब आप पूरी दुनिया को जीत सकते हैं, क्योंकि ब़डा आदमी बनने के लिए सिर्फ इन दो ही चीजों की जरूरत होती है-लक्ष्य और जुनून।
* जब आपका मन प्रसन्न होता है, तब आपके अंदर ऊर्जा का उत्पादन कई गुना बढ़ जाता है, जिसे आप सही दिशा में प्रयोग करके अधिक सफलता प्राप्त कर सकते हैं।
* जिन्हें लगता है कि वह सफल हो सकते हैं और जो ये सोचते हैं कि वे सफल नहीं होंगे, वे दोनों ही सही हैं। क्योंकि मन में जो विचार ज्यादा प्रभावशाली होंगे, वही आपकी सोच को निर्धारित करेंगे।
* आपको सफलता नहीं मिलती, क्योंकि आप सफलता नहीं मांगते। आप मांगते हो, फिर भी नहीं मिलता, क्योंकि तुम श्रद्धा से नहीं मांगते। लेकिन यदि आपके भीतर राई के दाने के बराबर भी विश्वास है, तो आप किसी पर्वत से कहिए कि यहां से खिसक जाओ, तब वह अवश्य खिसक जाएगा।
* जीवन की तमाम विफलताएं आपको आपकी वास्तविक योग्यता और क्षमता का आभास कराती है और फिर वही विफलताएं आपको सफलता का रास्ता दिखाती हैं।
8.जोखिम उठाए बिना आप जीवन में कभी कोई ब़डी कामयाबी हासिल नहीं कर सकते, क्योंकि अंग्रेजी में एक कहावत है, नो रिस्क नो रिवार्ड।
* फूलों की महक सिर्फ उसी दिशा में फैलती है, जिधर हवा का रूख होता है, लेकिन व्यक्ति की उन्नति के चर्चे पूरे विश्व में फैलते हैं।
* जागने के बाद कचरा, कू़डा-करकट चित्त से गिरना शुरू हो जाता है। फिर चित्त निर्मल होता चला जाता है और जब चित्त निर्मल हो जाता है, तब चित्त दर्पण बन जाता है।
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सोमवार को लोकसभा में मुख्य सतर्कता आयुक्त की नियुक्ति के लिए पूर्ण रूप से खुद को जिम्मेदार मानते हुए कहा कि पीजे थॉमस का इस पद के लिए चयन निर्णय की ब़डी चूक थी।
मगर प्रधानमंत्री की यह स्वीकारोक्ति वामदलों को संतुष्ट नहीं कर पाई और उन्होंने सदन का बहिष्कार कर दिया। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने लोकसभआ में इस संबंध में अपनी ओर से दिए वक्तव्य में कहा, इस मामले में शीर्ष अदालत ने जो निर्णय सुनाया है, हम उसको स्वीकार करते हैं और उसका सम्मान करते हैं। नए सीवीसी को नियुक्त करते संय सरकार अदालत के दिशा-निर्देशों का ध्यान रखेगी। सिंह ने कहा कि थॉमस की नियुक्ति के बाद सुप्रीम कोर्ट में दो जनहित याचिकाएं दायर की गई, जिसमें सीवीसी के रूप में थॉमस की नियुक्ति को चुनाती दी गई थी।
उन्होंने कहा कि माननीय सुप्रीम कोर्ट ने समिति की सिफारिशों को कानून-सम्मत नहीं पाया है और सीवीसी के रूप में थॉमस की नियुक्ति को रद्द कर दिया है। प्रधानमंत्री ने कहा, मैंने जम्मू में जो कुछ कहा, उसे यहां दोहराने में मुझे कोई हिचक नहीं है।
उन्होंने कहा, साफ तौर पर निर्णय में चूक थी, इसके लिए मैं पूरी जिम्मेदारी स्वीकार करता हूं। प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्रीय सतर्कता आयुक्त का पद 8 दिसंबर, 2010 को प्रत्युष सिन्हा के कार्यकाल पूरा होने के बाद खाली होना था। सीवीसी कानून 2003 के तहत प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और विपक्ष की नेता की सदस्यता वाली समिति की सिफारिश पर राष्ट्रपति सीवीसी की नियुक्ति करती हैं। उन्होंने कहा कि 3 सितंबर, 2010 को समिति की बैठक हुई जिसमें विपक्ष की नेता ने असहमति का रूख व्यक्त किया। समिति की सिफारिशों के आधार पर राष्ट्रपति ने पीजे थॉमस को सीवीसी के रूप में नियुक्त किया और उन्होंने 7 सितंबर, 2010 को शपथ ली।
प्रधानमंत्री ने हालांकि आज अपने मूल बयान में इस नियुक्ति की जिम्मेदारी स्वीकार नहीं की थी, जिस पर विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने क़डी आपत्ति जताते हुए कहा कि सिंह जब संसद के बाहर जम्मू-कश्मीर में इस बात की जिम्मेदारी ले चुके हैं, तो सदन में ऎसा करते हुए क्यों कतरा रहे हैं। इस पर प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें यह जिम्मेदारी स्वीकारने में कोई संकोच नहीं है।